Khel Khallas Slides BOX Part02_Slide7रमेश सुर्वे क्रिकेटर बनने का सपना लिए मैदान में दिन भर बल्ले से गेंद पीटता पसीना बहा रहा था। कुछ बड़ा कर गुजरने की आकांक्षा में वह कड़ी मेहनत कर रहा था। किसी को पता न था कि यही रमेश ऐसा खतरनाक सुपारी हत्यारा बनेगा, जो रम्या बटलर नाम से पहचाना जाएगा।

 

रम्या बटलर के बचपन का दोस्त बताता है कि वह शानदार क्रिकेटर था। उसके शाट्स ऐसे खतरनाक थे कि बल्ला पर गेंद लग जाए तो फील्डरों को पता नहीं चलता था कि गेंद कहां गई।

 

रमेश ने गोरेगांव (पूर्व) के पहाड़ी हाईस्कूल में पढ़ने वाली बचपन की मुहब्बत जरीना से दोस्ती की कीमत चुकाई। जरीना के परिजनों ये मुहब्बत ठुकरा दी। रमेश इश्क पाने के दर-दर भटका, तो स्थानीय गुंडे नंदू मेनन का आश्रय मिला। नंदू के जरिए रमेश- जरीना की शादी हुई, यही उसे अंडरवर्ल्ड में ले गया।

 

रमेश का नाम बटलर इसलिए पड़ा क्योंकि उसकी उंगलियां बहुत छोटी और कटी-फटी थीं जैसी रसोइयों या बटलर की होती हैं। यह भी कहते हैं कि छोटा कद होने से वह ‘बटलर’  कहलाया, जो ‘बटल्या’ का अपभ्रंश है। पूरी कहानी के लिए पढ़ें – खेल खल्लास